सुविधा अनुसार नियमों का पालन।
भारतीय मानसिकता का काला पक्ष
भारतीय समाज शायद दुनिया के सबसे पुराने समाजों मेसे एक है। भारतीय समाज के इस लंबे काल खंड में कई बदलाव हुऐ कुछ बदलाव प्रकृति के कारण हुए, कुछ बदलाव भारतीय समाज में कुछ विदेशी समाजों के विलय से आए और कुछ धर्म या राज्यों के द्वारा बनाये गए नियमों के कारण।
भारतीय समाज का सदियों से मुख्य घटक भारत का हिन्दू समाज है। हिन्दू धर्म अपने आप में बहुत लचीला होने का कारण इसकी मान्यता, रीतियों, रिवाजों अवं नियमों का अतिशय लचीला होना है। हिन्दू धर्म ने लोगों को संयम में रहने का पाठ दिया है इसीलिए यदि समाज का व्यक्ति जब असंयमित व्यव्हार करता है तो उसके आसपास का समाज जो संयम बनाये हुए है इनके असंयमित व्यव्हार को सहन करता और उन्हें क्षमा करदेता। जब असंयमित व्यव्हार करने वाली इकाई को अपने व्यव्हार में गलती दिखती तो वे ग्लानि वश उसे दुबारा नहीं करते इस प्रकार सामाजिक तारतम्य बना रहता।
भारतीय मानसिकता का काला पक्ष
भारतीय समाज शायद दुनिया के सबसे पुराने समाजों मेसे एक है। भारतीय समाज के इस लंबे काल खंड में कई बदलाव हुऐ कुछ बदलाव प्रकृति के कारण हुए, कुछ बदलाव भारतीय समाज में कुछ विदेशी समाजों के विलय से आए और कुछ धर्म या राज्यों के द्वारा बनाये गए नियमों के कारण।
भारतीय समाज का सदियों से मुख्य घटक भारत का हिन्दू समाज है। हिन्दू धर्म अपने आप में बहुत लचीला होने का कारण इसकी मान्यता, रीतियों, रिवाजों अवं नियमों का अतिशय लचीला होना है। हिन्दू धर्म ने लोगों को संयम में रहने का पाठ दिया है इसीलिए यदि समाज का व्यक्ति जब असंयमित व्यव्हार करता है तो उसके आसपास का समाज जो संयम बनाये हुए है इनके असंयमित व्यव्हार को सहन करता और उन्हें क्षमा करदेता। जब असंयमित व्यव्हार करने वाली इकाई को अपने व्यव्हार में गलती दिखती तो वे ग्लानि वश उसे दुबारा नहीं करते इस प्रकार सामाजिक तारतम्य बना रहता।
परंतु जब लोगों में स्वार्थ बढ़ा और ग्लानि का भाव कम हुआ तब एक चलता है का भाव समाज में आने लगा अतः संयमित व्यव्हार करने वालों को स्वार्थ परक असंयमित आचरण करने वालों से बचने के लिए सामाजिक नियमों का का चलन आया।
समय के साथ नियमों के पालन न करने वालों की संख्या बढ़ने पर दंड का प्रावधान किया गया। फिर छिड़ी बहस की दंड कितना होना चाहिये अर्थात किस प्रकार के नियम उल्लंघन की कितनी सजा या हर्जाना या दोनों। यहाँ सहिष्णु स्वाभाव के लोग सहन करते रहे और स्वार्थी लोग सहिष्णु स्वाभाव का गलत फायदा उठाते हुए संपन्न और सामर्थ्यवान होते गए। धीरे धीरे समाज में ऐसा वर्ग बढ़ गया जो चलता है कह कर छोटे मोटे नियम तोड़ते हुआ आगे बढ़ने लगा।
भारतीय समाज में लोगों को ग्लानि कैसे नियमों की अवहेलना करनेसे रोकता था के इतिहास में कई उदहारण है। कई ऐसे लोग हैं केवल भ्रष्टाचार के आरोप लगने भर से ही ग्लानि के चलते अपने जीवन को समाप्त कर दिया। पर आज आरोप लगने के बाद भी लोग संवैधानिक पदों पर बैठे रहते हैं।
देश में हर शहर का व्यक्ती अपने शहरवासीयों व्दारा यातायात नीयमों की अवहेलना कि आंखों देखी बता देगा। कभी आप नीयम तोड़ने वालेसे पूछे, सौ मेंसे नबे
देश में हर शहर का व्यक्ती अपने शहरवासीयों व्दारा यातायात नीयमों की अवहेलना कि आंखों देखी बता देगा। कभी आप नीयम तोड़ने वालेसे पूछे, सौ मेंसे नबे